तू नहीं तो ज़िन्दगी मैं और क्या रह जायेगा;
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तू नहीं तो ज़िन्दगी मैं और क्या रह जायेगा
दूर तक तन्हाइयों का सिलसिला रह जायेगा ।
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दर्द की सरी तहें और सारे गुज़रे हादसे
सब धुआँ हो जायेंगे एक वाक़िया रह जायेगा ।
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यूँ भी होगा वो मुझे दिल से भुला देगा मगर
ये भी होगा खुद उसी में इक ख़ला रह जायेगा ।
(ख़ला = अकेलापन)
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दायरे इन्कार के इक़रार की सरगोशियाँ
ये अगर टूटे कभी तो फ़ासला रह जायेगा ।
(सरगोशी = कानाफूसी)
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-इफ्तख़ार इमाम सिद्दीक़ी

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