सरकती जाये है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता;
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सरकती जाये है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता
निकलता आ रहा है आफ़ताब आहिस्ता आहिस्ता ।
(रुख़ = मुख, मुंह, चेहरा)
(आफ़ताब = सूरज)
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जवाँ होने लगे जब वो तो हमसे कर लिया परदा
हया यकलख़्त आई और शबाब आहिस्ता आहिस्ता ।
(यकलख़्त = आकस्मिक, अचानक, एकदम से)
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शब-ए-फ़ुर्क़त का जागा हूँ फ़रिश्तों अब तो सोने दो
कभी फ़ुर्सत में कर लेना हिसाब, आहिस्ता आहिस्ता ।
(शब-ए-फ़ुर्क़त = वियोग/ जुदाई की रात)
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सवाल-ए-वस्ल पे उनको अदू का खौफ़ है इतना
दबे होंठों से देते हैं जवाब आहिस्ता आहिस्ता ।
(सवाल-ए-वस्ल = मिलन का सवाल)
(अदू = विरोधी, शत्रु, रक़ीब)
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हमारे और तुम्हारे प्यार में बस फ़र्क है इतना
इधर तो जल्दी-जल्दी है उधर आहिस्ता आहिस्ता ।
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वो बेदर्दी से सर काटें ‘अमीर’ और मैं कहूँ उनसे
हुज़ूर आहिस्ता आहिस्ता जनाब आहिस्ता आहिस्ता ।
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-अमीर मीनाई

1 comment:

  1. Sarakti Jai Rukh Se Nakab, Aahista Aahista...

    Wowww....

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