ये ज़िन्दगी;
.
ये ज़िन्दगी
आज जो तुम्हारे
बदन की छोटी-बड़ी नसों में
मचल रही है
तुम्हारे पैरों से चल रही है
तुम्हारी आवाज़ में ग़ले से निकल रही है
तुम्हारे लफ़्ज़ों में ढल रही है ।
.
ये ज़िन्दगी
जाने कितनी सदियों से
यूँ ही शक्लें
बदल रही है ।
.
बदलती शक्लों
बदलते जिस्मों में
चलता-फिरता ये इक शरारा
जो इस घड़ी
नाम है तुम्हारा
इसी से सारी चहल-पहल है
इसी से रोशन है हर नज़ारा ।
(शरारा = चिंगारी)
.
सितारे तोड़ो या घर बसाओ
अलम उठाओ या सर झुकाओ ।
(अलम = सेना के आगे रहने वाला सबसे बड़ा झंडा)
.
तुम्हारी आँखों की रोशनी तक
है खेल सारा ।
.
ये खेल होगा नहीं दुबारा ।
ये खेल होगा नहीं दुबारा ।।
.
-निदा फाज़ली
.
ये ज़िन्दगी
आज जो तुम्हारे
बदन की छोटी-बड़ी नसों में
मचल रही है
तुम्हारे पैरों से चल रही है
तुम्हारी आवाज़ में ग़ले से निकल रही है
तुम्हारे लफ़्ज़ों में ढल रही है ।
.
ये ज़िन्दगी
जाने कितनी सदियों से
यूँ ही शक्लें
बदल रही है ।
.
बदलती शक्लों
बदलते जिस्मों में
चलता-फिरता ये इक शरारा
जो इस घड़ी
नाम है तुम्हारा
इसी से सारी चहल-पहल है
इसी से रोशन है हर नज़ारा ।
(शरारा = चिंगारी)
.
सितारे तोड़ो या घर बसाओ
अलम उठाओ या सर झुकाओ ।
(अलम = सेना के आगे रहने वाला सबसे बड़ा झंडा)
.
तुम्हारी आँखों की रोशनी तक
है खेल सारा ।
.
ये खेल होगा नहीं दुबारा ।
ये खेल होगा नहीं दुबारा ।।
.
-निदा फाज़ली
No comments:
Post a Comment