आए हैं समझाने लोग;
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आए हैं समझाने लोग
हैं कितने दीवाने लोग ।
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दैर-ओ-हरम में चैन जो मिलता
क्यूँ जाते मैख़ाने लोग ।
(दैर-ओ-हरम = मंदिर और मस्जिद)
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जान के सब कुछ, कुछ भी ना जाने
हैं कितने अन्जाने लोग ।
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वक़्त पे काम नहीं आते हैं
ये जाने पहचाने लोग ।
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अब जब मुझको होश नहीं है
आए हैं समझाने लोग ।
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-कुँवर मोहिन्दर सिंह बेदी 'सहर'

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