दोस्त बन बन के मिले मुझको मिटाने वाले;
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दोस्त बन बन के मिले मुझको मिटाने वाले
मैंने देखे हैं कई रंग बदलने वाले ।
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तुमने चुप रहकर सितम और भी ढाया मुझ पर
तुमसे अच्छे हैं मेरे हाल पे हँसनेवाले ।
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मैं तो इख़लाक़ के हाथों ही बिका करता हूँ
और होंगे तेरे बाज़ार में बिकनेवाले ।
(अख़लाक़ = इख़लाक़ = शिष्टाचार, सद्वृत्ति)
.
आख़री बार सलाम-ए-दिल-ए-मुज़्तर ले लो
फिर ना लौटेंगे शब-ए-हिज्र पे रोनेवाले ।
(मुज़्तर = व्याकुल, बेचैन, बेबस, लाचार)
(सलाम-ए-दिल-ए-मुज़्तर = व्याकुल दिल का सलाम)
(शब-ए-हिज्र = जुदाई की रात)
.
-सईद राही
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दोस्त बन बन के मिले मुझको मिटाने वाले
मैंने देखे हैं कई रंग बदलने वाले ।
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तुमने चुप रहकर सितम और भी ढाया मुझ पर
तुमसे अच्छे हैं मेरे हाल पे हँसनेवाले ।
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मैं तो इख़लाक़ के हाथों ही बिका करता हूँ
और होंगे तेरे बाज़ार में बिकनेवाले ।
(अख़लाक़ = इख़लाक़ = शिष्टाचार, सद्वृत्ति)
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आख़री बार सलाम-ए-दिल-ए-मुज़्तर ले लो
फिर ना लौटेंगे शब-ए-हिज्र पे रोनेवाले ।
(मुज़्तर = व्याकुल, बेचैन, बेबस, लाचार)
(सलाम-ए-दिल-ए-मुज़्तर = व्याकुल दिल का सलाम)
(शब-ए-हिज्र = जुदाई की रात)
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-सईद राही
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