मैंने दिल से कहा, ऐ दीवाने बता;
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मैंने दिल से कहा, ऐ दीवाने बता
जब से कोई मिला, तू है खोया हुआ
ये कहानी है क्या, है ये क्या सिलसिला, ऐ दीवाने बता ।
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मैंने दिल से कहा, ऐ दीवाने बता
धड़कने में छुपी, कैसी आवाज़ है
कैसा ये गीत है कैसा ये साज़ है
कैसी ये बात है, कैसा ये राज़ है, ऐ दीवाने बता ।
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मेरे दिल ने कहा, जब से कोई मिला
चाँद, तारे, फ़िज़ा, फूल, भंवरे, हवा
ये हसीं वादियाँ, नीला ये आसमान
सब है जैसे नया, मेरे दिल ने कहा ।
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मैंने दिल से कहा, मुझको ये तो बता
जो है तुझको मिला, उसमे क्या बात है
क्या है जादूगरी, कौन है वो परी, ऐ दीवाने बता ।
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मेरे दिल ने कहा
न वो कोई परी, न कोई महजबीं
न वो दुनिया में सबसे है ज्यादा हसीं
सीधी-साधी सी है, भोली-भाली सी है
लेकिन उसमे अदा इक निराली सी है
उसके बिन मेरा जीना ही बेकार है ।
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मैंने दिल से कहा, बात इतनी सी है के तुझे प्यार है ।
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मेरे दिल ने कहा, मुझको इक़रार है, हाँ मुझे प्यार है ।
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-जावेद अख़्तर

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