तेरी बेरुखी और तेरी मेहरबानी;
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तेरी बेरुखी और तेरी मेहरबानी 
यही मौत है और यही ज़िंदगानी ।
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वही एक फ़साना वही एक कहानी 
जवानी जवानी जवानी जवानी ।
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लबों पे तबस्सुम तो आँखों में पानी
यही है यही दिल जलो कि निशानी ।
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बताऊँ है क्या आंसुओ की हकीकत 
जो समझो तो सब कुछ न समझो तो पानी ।
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-कुँवर मोहिन्दर सिंह बेदी 'सहर'

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