एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी;
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एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी
ऐसा तो कम ही होता है वो भी हों तनहाई भी ।
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यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं
कितनी सौंधी लगती है तब माज़ी की रुसवाई भी ।
(माज़ी = बीता हुआ समय)
(रुसवाई = बदनामी)
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दो दो शक़्लें दिखती हैं इस बहके से आईने में
मेरे साथ चला आया है आप का इक सौदाई भी ।
(सौदाई = पागल, बावला)
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ख़ामोशी का हासिल भी इक लम्बी सी ख़ामोशी है
उन की बात सुनी भी हमने अपनी बात सुनाई भी ।
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-गुलज़ार (समपूरन सिंह कालरा)

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