हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते;
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हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते ।
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जिसकी आवाज में सिलवट ही निगाहों में शिकन
ऐसी तस्वीर के टुकड़े नही जोड़ा नहीं करते ।
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शहद जीने का मिला करता हैं थोड़ा थोड़ा
जाने वालों के लिये दिल नही तोड़ा नही करते ।
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लग के साहिल से जो बहता हैं उसे बहने दो
ऐसे दरिया का कभी रुख़ नहीं मोड़ा करते ।
(साहिल = किनारा)
(रुख़ = मुख, मुंह, चेहरा)
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-गुलज़ार (समपूरन सिंह कालरा)

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