एक परवाज़ दिखाई दी है;
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एक परवाज़ दिखाई दी है
तेरी आवाज़ सुनाई दी है ।
(परवाज़ = उड़ान)
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जिसकी आँखों में कटी थी सदियाँ
उस ने सदियों की जुदाई दी है ।
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सिर्फ़ एक सफ़हा पलट कर उसने
बीती बातों की सफ़ाई दी है ।
(सफ़हा = पृष्ठ, पन्ना)
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फिर वहीं लौट के जाना होगा
यार ने कैसी रिहाई दी है ।
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आग में क्या क्या जला है शब भर
कितनी ख़ुशरंग दिखाई दी है ।
(शब = रात)
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-गुलज़ार (समपूरन सिंह कालरा)
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एक परवाज़ दिखाई दी है
तेरी आवाज़ सुनाई दी है ।
(परवाज़ = उड़ान)
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जिसकी आँखों में कटी थी सदियाँ
उस ने सदियों की जुदाई दी है ।
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सिर्फ़ एक सफ़हा पलट कर उसने
बीती बातों की सफ़ाई दी है ।
(सफ़हा = पृष्ठ, पन्ना)
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फिर वहीं लौट के जाना होगा
यार ने कैसी रिहाई दी है ।
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आग में क्या क्या जला है शब भर
कितनी ख़ुशरंग दिखाई दी है ।
(शब = रात)
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-गुलज़ार (समपूरन सिंह कालरा)
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