फिर नज़र से पिला दीजिये;
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फिर नज़र से पिला दीजिये
होश मेरे उड़ा दीजिये ।
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छोड़िये दुश्मनी की रविश
अब ज़रा मुस्कुरा दीजिये ।
(रविश = रंग-ढंग)
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बात अफ़साना बन जायेगी
इस क़दर मत हवा दीजिये ।
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आइये खुल के मिलिये गले
सब तक़ल्लुफ़ हटा दीजिये ।
(तक़ल्लुफ़ = संकोच, लिहाज)
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कब से मुश्ताक़-ए-दीदार हूँ
अब तो जलवा दिखा दीजिये ।
(मुश्ताक़-ए-दीदार = दर्शन का अभिलाषी)
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-जाम नसीमी

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